डिजिटल डेमोक्रेसी

पांच साल से अंधेरे में था गांव, कैसे हुआ रोशन... जानने के लिए पढ़ें पूरी कहानी

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पन्ना जिले की ग्राम पंचायत बृजपुर के रखेल टोला में पांच साल से बिजली नहीं थी। 2013 में ट्रांसफार्मर जला तो बार-बार शिकायत के बाद भी बिजली विभाग वालों ने नहीं बदला। ऊपर से 5000 हजार रुपए बकाया निकालकर तंग किया सो अलग। ग्रामीणों को यह जानकारी नहीं थी कि आगे शिकायत कहां की जाए। इस बीच घर रोशन करने का एक मात्र साधन था, केरोसिन। जिससे लालटेन और चिमनी की रोशनी में सारे काम किए जा रहे थे, लेकिन केरोसिन भी इतना नहीं मिल पाता था कि महीनेभर घर रोशन रखे जा सकें। रखेल टोला के 40 परिवारों की 200 से अधिक की आबादी को शाम होते ही जहरीले कीड़े-मकौड़ों का खौफ सताने लगता।

17 जून 2017 की एक घटना से सभी को झकझोर दिया। कक्षा दूसरी के छात्र अखिलेश को बिच्छू ने काटा, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद गांव के लोगों ने एकजुट होकर ट्रांसफार्मर बदलवाने की ठानी। उन्होंने पीएलए बैठक की योजना बनाई। इसके लिए डिजिटल डेमोक्रेसी कार्यक्रम के लोगों से संपर्क किया और उनसे मदद मांगी। गौरतलब है कि रखेल टोला के कुछ परिवारों के पास कृषि भूमि है। बाकी परिवार खेतीहर मजदूर हैं। कुछ अन्य कार्य यानी खुली मजदूरी करते हैं, इसलिए उनकी पहुंच जिला मुख्यालय पन्ना तक भी कम ही है। यहां जाने का मतलब है, एक दिन की मजदूरी का नुकसान और आने-जाने का खर्च। हालांकि, उन्हें माह में पूरे दिन काम भी नहीं मिलता है।

रखेल टोला की कोमल बाई और जन्नत बाई ने बताया कि ग्रामीणों के संपर्क करने के बाद ई-दस्तक केंद्र के साथियों ने पीएलए बैठक की। इसमें ग्रामीणों ने पांच साल से बंद ट्रांसफार्मर बदलवाने की रणनीति बनाई। उन्होंने समस्या के समाधान के विकल्प की सूची तैयार की, जिसमें से सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत करना और कलेकटर की जनसुनवाई में मामला उठाना तय किया। इस पर ई-दस्तक केंद्र के साथियों ने ग्रामीणों को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने और जनसुनवाई में आवेदन देने की प्रक्रिया बताई।

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बैठक के बाद रखेल टोला के महेंद्र गौंड ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की। डिजिटल डेमोक्रेसी के साथियों ने प्रिंट मीडिया, इलेकट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया यानी फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप आदि पर अपनी समस्या सांझा की। इस तरह उन्होंने ग्रामीणों के मुद्दे की पैरवी की। अखबारों ने भी लगातार खबर प्रकाशित कर ग्रामीणों की आवाज उठाई। 30 अप्रैल 18 को कलेकटर की जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने शिकायत आवेदन दिया। ग्रामीणों के अथक प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि बिजली विभाग ने 20 जून 18 को रखेल टोला का ट्रांसफार्मर बदल दिया। अब गांव रोशन है। अब ग्रामीण भी अपनी समस्याओं को लेकर पीएलए बैठक करते हैं, जिसमें ई-दस्तक केंद्र के लोगों की मदद लेते हैं।