डिजिटल डेमोक्रेसी

इंटरनेट ने बदल दी युवक की जिंदगी, वह बन गया समाज का मददगार

mastram

पन्ना के छोटे से गांव धनौजा के मस्तराम के जीवन की दिशा इंटरनेट ने बदल दी। आदिवासी बहुल इस गांव में मस्तराम इंटरनेट के जरिये कई सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल कर लोगों को उनका लाभ दिलवाता है। इसी के अपनी पढ़ाई से जुड़े विषयों की तैयारी इंटरनेट के जरिये कर लेता है। यू तो मस्तराम के यहां लगभग सबकुछ ठीक है। बड़ा भाई बीएसएनएल में सब इंजीनियर है। बहन एमएससी की पढ़ाई कर रही है, लेकिन तमाम सरकारी योजनाएँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के कारण वह खुद को पिछड़ा महसूस कर रहे थे।

ऑनलाइन कोई काम करना हो तो 35 किलोमीटर दूर पन्ना जाना पड़ता था। 60 रुपए बस का भाड़ा और फिर कंप्यूटर सेंटर का शुल्क देना अखरता था। कई बार मस्तराम के पिता रामदीन गांव के लोगों के पास ऐसी कोई जानकारी लेने जाते तो वे पहले उससे बेगार करवाते फिर मदद करते। यह सब मस्तराम से देखा नहीं गया और खुद मोबाइल खरीदकर ये तमाम काम करने की ठानी।

मस्तराम की मुलाकात डिजिटल डेमोक्रेसी परियोजना के बलॉक समन्वयक विनोद से हुई। उन्होंने मस्तराम को इससे जुडकऱ वालेंटियर के रूप में काम करने की सलाह दी। मस्तराम ने मोबाइल फोन लिया और इंटरनेट सर्फिंग सीखी। इसके बाद वह सारे काम खुद करने लगा, जिनके लिए कभी पन्ना जाया करता था या पिता को बेगारी करनी पड़ती थी। इतना ही नहीं, मस्तराम अब ई-वालेंटियर है। वह अन्य लोगों के भी काम करता है। इससे गांव में खुशहाली आई है। मस्तराम को सोशल मीडिया की भी अच्छी जानकारी हो गई है। इससे वह देश-दुनिया के खबरों से रूबरू रहता है और गांव के लोगों को भी बताता है।