डिजिटल डेमोक्रेसी

ऑनलाइन शिकायत पर सुधरे हैंडपंप, मिला पीने का साफ पानी

handpumpजब उनका परिचय ई-दस्तक केंद्र और ई-वालेंटियर से नहीं था, तब उनके लिए पीने का साफ पानी तक मुहैया नहीं था। हम बात कर रहे हैं पन्ना जिले की बृजपुर ग्राम पंचायत के गिरवानी टोले की। आदिवासी बहुल इस टोले में करीब 150 परिवार रहते हैं। इनमें से सर्वाधिक 110 आदिवासी परिवार हैं। इनके पेयजल के लिए दो हैंडपंप और एक बोर है। हैंडपंप ज्यादातर समय बंद ही रहते थे। मैकेनिक ढूंढे नहीं मिलता था। लोग ग्राम पंचायत में सरपंच और सचिव से शिकायत करते तब भी समाधान नहीं होता था।

ऐसे में लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित बाघन नदी का पानी पीना पड़ता था। हालांकि, गर्मी के दिनों में बाघन में भी पानी बहुत कम और प्रदूषित हो जाता है। इसे पीने से बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को उल्टी, दस्त, पेटदर्द जैसी जलजनित बीमारियां होती थीं। सिस्टम की अनदेखी और ग्रामीणों की दुर्दशा की जानकारी गिरवानी टोला के ई-वालेंटियर ब्रजेंद्र गौड़ को मिली तो उन्होंने समस्या का समाधान करने की ठानी। ब्रजेंद्र ने ब्लाक समन्वयक विनोद और धनौजा भटिया के ई-वालेंटियर दुर्गेश गौड़ के साथ ई-दस्तक केंद्र पर नौ जून 2018 को पीएलए बैठक रखी।

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पीएलए (पार्टिसिपेट लर्निंग एकशन) बैठक में विनोद ने ग्रामीणों को सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 की जानकारी दी और शिकायत करने का तरीका बताया। उन्हें ये समझाया कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करना बहुत आसान है। वह अपने मोबाइल के जरिये शिकायत कर सकते हैं। उन्हें ये भरोसा दिया कि यहाँ शिकायत करने से समस्या का समाधान होगा। इस बैठक में आए ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं पर चर्चा की। तमाम समस्याओं की प्राथमिकता तय की। दरअसल, यह बैठक इसीलिए की जाती है कि ग्रामीण अपनी समस्याओं पर मिलकर चर्चा सकें। पीएलए बैठक के बाद गिरवानी टोला के कन्छेदी ने हैंडपंप खराब होने की ऑनलाइन शिकायत अपने मोबाइल फोन के जरिये की। उन्हें शिकायत नंबर भी मिला। करीब एक सप्ताह में दोनों हैंडपंप सुधार दिए गए। इससे डिजिटल संसाधन पर ग्रामीणों का भरोसा और जानकारी बढ़ी है। अब उन्हें बाघन नदी का प्रदूषित पानी भी नहीं पीना पड़ता है। इस तरह ई-वालेंटियर, ई-दस्तक केंद्र और समन्वयक सहायक सिद्ध हुए। इससे पहले ग्रामीण केवल 100 नंबर के बारे में जानते थे।